{"version":"1.0","type":"rich","provider_name":"Acast","provider_url":"https://acast.com","height":250,"width":700,"html":"<iframe src=\"https://embed.acast.com/$/5ec3d9497cef7479d2ef4798/5f15ed01d7f69544e493740b?\" frameBorder=\"0\" width=\"700\" height=\"250\"></iframe>","title":"एन एल चर्चा 08- प्रधानमंत्री का संसद में बयान, झोलाछाप डॉक्टर की करतूत, मालदीव संकट व अन्य","description":"संसद के दोनों सदनों में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बयान, उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में एक झोलाछाप डॉक्टर द्वारा करीब 40 लोगों को एचआईवी से संक्रमित करने का मामला, भाजपा सांसद विनय कटियार द्वारा मुसलमानों के खिलाफ दिया गया बयान, राज्यसभा में नेता विपक्ष गुलाम नबी आज़ाद का यह कहना कि राज्यसभा टीवी को भाजपा टीवी बनाने की कोशिश हो रही है और साथ में भारत के दक्षिण-पश्चिमी पड़ोसी मालदीव में फिर से पैदा हुआ राजनीतिक संकट इस बार की चर्चा के मुख्य विषय रहे.\n\nचर्चा में इस बार अतुल चौरसिया, आनंद वर्धन और अमित भारद्वाज के साथ एनडीटीवी के एडिटर न्यूज़ प्रियदर्शन बतौर मेहमान शामिल हुए.\n\nझोलाछाप डॉक्टर की करतूत को देश की लचर और जर्जर स्वास्थ्य व्यवस्था का नतीजा बताते हुए प्रियदर्शन ने कहा, “दरअसल इस समस्या की जड़ ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर मौजूद घनघोर गरीबी  है. संसाधनों के अभाव में लोग इस तरह के झोलाछाप चिकित्सकों के पास इलाज कराने के लिए मजबूर हैं. देश के किसी भी जिले के सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर देखा जा सकता है वहां, स्वच्छता की बजाय नरक का साम्राज्य दिखेगा. 20-30 साल पहले तक यही चिकित्सालय बेहतर तरीके से काम करते थे. दिनोंदिन इनकी दशा बदतर हुई है.”\n\nआनंद ने विनय कटियार के बयान पर कहा कि ये मौजूदा सरकार के फुट सोल्जर्स हैं, जिन्हें ज्यादा तवज्जो नहीं दी जानी चाहिए. संभव है कि चर्चा में आने के लिए हताशा में  भी वे इस तरह के बयान दे रहे हों.\n\nअमित भारद्वाज ने प्रधानमंत्री के लोकसभा और राज्यसभा में दिए गए भाषण में की गई कुछ दिलचस्प तथ्यात्मक गलतियों की ओर ध्यान दिलाया. मसलन बैंकों के एनपीए के आंकड़े को उन्होंने पूर्ववर्ती सरकार की नाकामी से जोड़ा जो कि असल में एनपीए के आंकड़े न होकर कुल लोन की मात्रा थी.\n\nइस पर आनंद वर्धन का तर्क था कि अक्सर कुछ नेता सरकारी बाबुओं के ऊपर जरूरत से ज्यादा निर्भर होने के कारण ऐसी गलती करते हैं. इस मामले में भी लगता है कि जिस अधिकारी ने मोदीजी को आंकड़े उपलब्ध करवाए उसने जिम्मेदारी से अपना काम नहीं किया.\n\nन्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया के मुताबिक वर्तमान प्रधानमंत्री द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर किया गया हमला उनके पद की गरिमा के अनुरूप नहीं था. अतुल कहते हैं, “भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दो महान नेताओं को उनकी मौत की आधी सदी बाद इस तरह से आमने-सामने खड़ा करना एक प्रधानमंत्री को शोभा नहीं देता. आज से 50 साल बाद परिस्थितियों को समग्रता से रखे बेगैर कोई कहे कि मोदी ने आडवाणी का मौका छीन लिया, तो ठीक नहीं होगा. प्रधानमंत्री स्वस्थ नजीर स्थापित नहीं कर रहे हैं.”","author_name":"Newslaundry.com"}